Friday, 26 September 2014

"संपादकीय"


                                                           "संपादकीय"

सम्माननीय पाठको,

"दिशा" का प्रथम अँक आप के सामने है। ये हम सब की एक सामूहिक ख़ुशी इसलिये है क्योंकि इस सफलता में हम सबका योगदान है, किसी का प्रत्यक्ष तो किसी का परोक्ष। "दिशा" का संपादन मेरे लिये व्यक्तिगत रूप से भी एक गर्व का दायित्व है। ये वो माध्यम है जिस से हम सब आपस में जुड़ते हैं, अपनी जड़ो से जुड़ते हैं। अतः ये कहना गलत नहीं होगा कि हमारी एकजुटता का प्रतीक है "दिशा"।

इस संस्करण को हमने 'परिचय संस्करण' के रूप में आप सबके सामने रखा है। जिस से समूचे क्षेत्र को नैनी एकता सोसाइटी (न्यूज़) की जानकारी हो, उसके क्रियाकलापों की जानकारी हो। सबको ये ज्ञांत हो कि इसी मिट्टी में पैदा हुये कुछ बच्चों ने मिलकर एक वेड़ा उठाया है कि अपने क्षेत्र के लिए, अपने राष्ट्र के लिये कुछ करना है।इसलिए ये आवाहन भी है इस तरह की सोच रखने वाले सभी भाई -बहनों के लिये कि आइये, साथ चलें और क्षेत्र को एक ऐंसी राह पर ले जाने का प्रयास करें जहाँ हमारी आने वाली पीढ़ी इतनी जागरूक बन सके कि उसका इस्तेमाल न हो सके। वो एक जिम्मेदार नागरिक बने जो मात्र अपनी परिवार का हि बेहतर निर्वहन न करे अपितु अपने समाज की जिम्मेदारी के लिए भी तत्पर हो।

"दिशा" को एक पत्रिका के रूप में आप के सामने रखने के पीछे एक मुख्य सोच ये है कि हम अपने क्षेत्र के आखिरी नागरिक तक पहुँच सके, ताकि धीरे-धीरे इस मुहिम में हर कोई भागीदार बने। क्षेत्र के बहुत से युवाओं से हम सोशल मीडिया के माध्यम से भी वार्तालाप कर लेते हैं और उसका भी अपना महत्व है लेकिन "दिशा" की कोशिश हमारी जड़ों तक पहुँचने की होगी। हर उस भाई बहन से वार्तालाप करने की होगी जिस से अन्य माध्यमों से नहीं पहुँच पा रहे हैं। ये कहना बेहतर होगा कि हम सबका आपसी सँवाद है "दिशा" जो हमारे आने वाले कल की दिशा तय करेगी।

यूँ तो "न्यूज़" के बारे में सिलसिलेवार जानकारी इस संस्करण में उपलब्ध है ही, एक और बात यहाँ जरूर कहना चाहूँगा कि "न्यूज़" क्षेत्र के रैवासी और प्रवासी, सभी भाई बहनों के लिए वो प्लेटफॉर्म बनने की कोशिश है जिस से हम सब एक साथ जुड़े रहें, एक दूसरे का सुख दुःख बाँटे। ज़िन्दगी की रोज की जरूरतों में साझीदार बने। "न्यूज़" क्षेत्र और उसके लोगों की अधिक से अधिक जानकारी रखना चाहता है, ताकि कल जरुरत पड़ने पर उसका बेहतर परिणाम मिल सके। उदाहरण के तौर पर हम क्षेत्र के अलग अलग तरह के व्यवसायों, सरकारी सेवाओं, प्राइवेट सेवाओं में लगे लोगों की जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं। ये संपर्क कई तरह सेकारगर सिद्ध हो सकते हैं, जैंसे की किसी विद्यार्थी को गाइड करने में, नौकरी के लिए मदद करने में, भविष्य की संभावनाओं की जानकारी देने मे आदि।   

अंत में यही कहूँगा कि ये एक ऐंसा कार्य है जिसमे जितना अधिक सहयोग सभी से मिलेगा, उतना ही सफल होगा। इसके अंतिम उद्देश्य कि पूर्ति तभी होगी जब हम एकजुट होकर प्रयास करें। इसे एक सामूहिक मुहिम बनाकर क्षेत्र निर्माण में भागीदार बने। आइये एक साफ़ और स्वच्छ मन से इस पहल को आगे ले जाने की सकारात्मक कोशिश करें।

दिशा के इस अंश के बारे में आप अपनी प्रतिक्रियायें जरूर भेजें ताकि हम इसमें निरंतर सुधार कर सकें। आप पत्राचार द्वारा (न्यूज़ के पते पर) या फिर इ-मेल द्वारा भी हम तक पहुँच सकते हैं।  सभी से यही उम्मीद कि बस "द्वी घड़ि, मुल्का खुणि"

विजय गौड़
vijay.gaur@hotmail.com


Thursday, 11 September 2014

यकुलाँस

रुप्या अर भलि ज़िंदगी कि खोज मा मुलुक छोड़ि निकल्याँ मि जना भण्डि दगड्यों क उद्गार लिखणा कु ज्यु बोलि आज, ज्यु क्य बोलि बचपनै यादन अफि लिखवै दये। देखा दि क्य तुम थैं बि लगद यनु?

रुप्या त भण्डि कमै द्येलु,
पण वु निवारू कु चखुल्या घोल सि खटला कख्वै ल्येलु?
कख्वै ल्येलु वा निफटण्या निंद?
ज्वा सरसु-उप्पन बि नि खर्र्ये सकदा छा। 
कख्वै ल्येलु वु बाटा का द्वी तरफ लग्युं झुंगरयडु?
जैमा द्वी फौंटा बाँधि कि पैथर बटि आण वला कि फरकण्डी करांदा छाया। 
अर तुम द्वी चार उटकम्या, 
भ्युंला डाला पैथर बटि गिणती गिणदा छाया…………… 
एक, द्वी, तीन… 
अर फिर वु परवचन,
कनि रांड व्है रै यूँ छ्वारों कि.……

रुप्या त भण्डि कमै द्येलु 
पण बचपनै वा छवकरल्या हैंसि कख्वै ल्येलु?
कख्वै ल्येलु वु सुबेर सुबेर मास्टर जि कु नौला चुण्डणु?
कख्वै ल्येलु वु टीवी मा हीरो का बाल देखि कि 
राति मा मुंड फर वु गिल्लु रुमाल बंधणु?
कख्वै ल्येलु वु स्याला ब्यो वलु घाम?
कख्वै ल्येलु वा बवणी, लुण्ठ्या वु चाम?

रुप्या त भण्डि कमै द्येलु,
पण अपड़ु वु खुदौण्या मुलुक कख्वै ल्येलु?
जरूर हिटलि तु यूँ सिमेंटैट रोडों माँ,
पण वु गुच्छि का खडवलोँ वलु बाटु कख्वै ल्येलु?
कख्वै ल्येलु वु धंण्या मा कु लूँण,
अर छ्वैऱयूँ का बस्ता बिटि च्वरीं कखड़ि?
कख्वै ल्येलु पंडजी कु दीन बंदौ बली राजा वलु पौंजा,
अर भैणि कि लाड़ै रखड़ि?     

वा रे रुप्या, क्य-क्य नि छुडै तिन,
ब्वै-बाब, भै-भैणा, मुलुक, अपड़ा, अपड्यांस,
निहोंण्या, सबि त ली ग्ये तू,
मैमु रै ग्ये त बस 
यु युकुलु मन, 
अर या म्येरि लाट यकुलांस,
या म्येरि लाट यकुलाँस!!!

@ विजय गौड़
११ सितम्बर २०१४ 
          

Saturday, 16 August 2014

"सबला"

आजै समाजकि हालत देखि कि माँ-भैण्यो सणि म्येरू कविमन कु आवाहन!!

"सबला"

खड़ो, यनु डौर डौरिकि रौण नि,
लचार बणि छुचि ज्योँण नि  
अपड़ी लड़ै थैं अफि लड़ तू,
ये ज़माना क सारा न कुच होण नि। 

डरखु छन वु जु त्वै अबला बुल्दन,
त्वै से भंडि बल कबि कैमा व्है?
कुच जाणिकि "जणदरि" बणै होलि वेन तू,
तु शक्ति रूप विधातकु छै,
उठ, अपणि ईं तागत पछ्याँण,
सुद्दि-सुद्दि कैकि अब सौण नि,
अपड़ी लड़ै थैं अफि लड़ तू,
ये ज़माना क सारा न कुच होण नि। 

भौत ह्वै ग्ये दुन्या कु मुक हेर-हेरी,
भौत सैयालि तिन, भौत ह्वै य खैरि,
डमों वूं गिच्चों, फोड़ यनि आंख्यों,
जौन बुरु बाँचि, जौन त्वै छेदि,
फूँक, वु जोश अफि ईं गात मा,
कै हैंकन या गँगा बगौण नि,
अपड़ी लड़ै थैं अफि लड़ तू,
ये ज़माना क सारा न कुच होण नि। 

कॉपी राइट @ विजय गौड़ 
१६ अगस्त २०१४ 
फ्रेस्नो, कैलिफ़ोर्निया



Wednesday, 30 July 2014

"युवा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव से जुड़ना चाहता है, संजय गौड़ के फेसबुक पेज से सिर्फ ०४ दिन में जुड़े क्षेत्र के १०० से अधिक युवा, पोस्ट को अलग अलग प्लेटफॉर्म्स पर मिली सराहना"

"युवा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव से जुड़ना चाहता है, संजय गौड़ के फेसबुक पेज से सिर्फ ०४ दिन में जुड़े क्षेत्र के १०० से अधिक युवा, पोस्ट को अलग अलग प्लेटफॉर्म्स पर मिली सराहना"

नैनीडांडा क्षेत्र का युवा निःसंदेह अपने क्षेत्र के लिए कुछ करना चाहता है अब चाहे वह गाँव में रहता हो या मजबूरियों के कारण प्रवासी हो गया हो। अपनी जड़ों से दूर होने का दर्द हर युवा के मन में दिखता है लेकिन साथ ही साथ वो कोशिश भी करना चाहता है। इस बात का अंदाजा लगता है क्षेत्र के लिये ईमानदारी से काम करने वाले एक युवा को मिले समर्थन से। आज युवाओं को संजय में उम्मीद दिखती है। कुछ उदाहरण देखिये कि किस तरह युवा एवं जागरूक नागरिक अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है : -

Narendra Rawat (ग्राम :केलधार, वर्तमान में दिल्ली):  प्रणाम भाई जी। बहुत ही अच्छा प्रयास सबका साथ सबका विकास, पलायन का कारण युवा पीढ़ी को क्षेत्र मैं रोजगार न मिलना। समय आ चूका है कि हर प्रवासी को अपने गावं से पलायन कम करने,रोकने के लिए, कुछ न कुछ अपने गावों में या आसपास कोई स्वरोजगार के उपाय तलासने होंगे,

सतेन्द्र रावत (ग्राम बिलोटा, चामसैण, वर्तमान में दिल्ली): बड़े भाई को नमस्कार, बहुत अच्छा लगा आपने अपने विचार रखे, काम मुश्किल जरूर है लेकिन असंभव नहीं, जरूरत है जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने की, बिना लोगों को जागरूक किये कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सकता है, और इस मुहीम में अधिक से अधिक लोगों को साथ आना होगा तभी हम लोग अपनी मंजिल के लिए एक रास्ते का निर्माण कर सकते है.

ख़्वाहिशों से नहीं गिरते महज़ फूल झोली में, कर्म की शाख को हिलाना होगा;
न होगा कुछ कोसने से अंधेरें को, अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा।


Chandra Mohan Negi (दिल्ली) bahut acha gaur ji...asha karte hain aap apne iss karyakaal main kuch thosh kadam apne block ke vikas ke uthayenge ...

Diggi Rawat ( ग्राम कौला, वर्तमान में दिल्ली) Aapne nischit hi Nainidanda Block ki rajniti me ek bench mark set kar diya h...


Nandan Singh Rawat ( कौला मल्ला) Palayan se sabse jyada mai dukhi hoon... Mai vill- kaula malla .post- nainidanda ka niwasi hoon.. Aap mujhe ye batayrn ki mai gawn me rahkar kya karoon. Kuoon na palayan ka hissa banu. sare gawn ki jamin banjar ho gayi hai kyoon.... ye janenge aap ..bandaroon or suwaroon ki wajah se..hum inhe kanunan mar nahi sakte ..besak gawn chhod chuke hain.aap inka bandaroon or swaroon ka ilaz karwa dijiye .mai apko bachan deta hoon ki gawn jakar kuchh na kuchh apne khetu se hi gujara kar lunga..sare gawoon ke palayan ki yahi kahani hai...aap jatur likhna......


सतेन्द्र रावत संजय गौड़ भाई जी मैं दाद देता हूँ आपके हिम्मत की कि आप लगातार प्रयास कर रहे है, और आपके कदम कभी भी डगमगाए नहीं. अन्यथा जो गावों में राजनीती का स्तर हो चुका है उससे तो अच्छे खासे लोगों के कदम डगमगा जायें. गाँव में अगर आज सबसे पहले कुछ करना है तो वो है शिक्षा का स्तर ऊपर उठाना, सिर्फ स्कूली शिक्षा ही नहीं अपितु सामाजिक शिक्षा का भी प्रचार प्रसार करना होगा, तभी हम एक जागरूक समाज की कल्पना कर सकते है.

Hoshiyar Rawat ( जड़ाऊखांद, वर्तमान में दिल्ली) Bahut sundar aur doorgami soch hai goud g aur vastav mein is tarah ke vichar aur rachnatmak kam ki aj pure uttarakhand ko bahut jada avasyakta hai jiski suruat gawn star par honi chahiye apki bat isliye bhi prasangik hai kyoki aap khud mein high qualified hain aur navyuvak apse prerna le sakte hain . 
Khas bat ye hai ki ab is soch ko jald se jald moort roop dekar udahan pesh kiya jay taki palayan karte yuvaon ko apne hi gawn ksetr mein kuchh kam karne ki lalak paida ho sake ye sabse jada jaruri hai aur mera khayal hai agar unhe unki mehnat ka 50% bhi return mil jata hai bhagambhag kuchh had tak lagam lag jayegi. 
N G O s ke bhi apne prayas jari hain magar utne effective abhi tak nahi huye hain effective ap jaise log hi ho sakte hain jo khud wahan par hain doosron ko bhi motivate kar sakte hain 
paramparik kheti se itar hum log unnat kism ke veejon ka istemal kar vaigyanik tareeke se kheti aur pashupalan karen to nischit safalta milegi.


mai ab tak wahi gawn me tha aur fir wapas ane ke lie aatur hoon yakeen janiye mujhe lagta hai jo jindgi gawn ki hai waisi shahar ki ho hi nahi sakti 
yahan thoda paisa hai magar sukh chain bilkul nahin kahin bhi nahi kya raja aur kya rank is mamle mein sab ek hain .


Rakesh Rawat (केलधार, वर्तमान में सेना में अधिकारी) Bade khed k saath likhna pad raha h k aaj jo bhi not all hamaare pratinidhi chune jaate hain they all thinks about themselves that's why we r unknown about the valuable schemes offered by the government so the generation looks their future abroad. 

ऐंसे ही न जाने कितनी प्रतिक्रियाएं आई हैं। 

इस प्रक्रिया को निरंतरता की जरुरत पड़ेगी, मुझे उम्मीद है की ये सामूहिक प्रयास जरूर अच्छे परिणाम क्षेत्र के लिए आने वाले समय में लायेगा। 

विजय गौड़ 

Sunday, 27 July 2014

"युवाओं को क्षेत्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका के लिये तैयार होना होगा, सकारात्मक एवम रचनात्मक राजनीति का हिस्सा बनकर इसकी शुरुवात की जा सकती है"


भै-भैणों /दाना सयणों,

आज ही हमारे ब्लॉक में नई कार्यकारिणी का गठन हुआ है और मैं निर्वाचित प्रतिनिधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से भी बधाई देना चाहूँगा। साथ ही उम्मीद करता हूँ कि एक-२ निर्वाचित प्रतिनिधि क्षेत्र निर्माण में अपना पूरा योगदान देगा। 

पलायन शुरू से ही हमारी एक बड़ी समस्या रही है और लगभग हर परिवार से किसी न किसी रूप में पलायन हुआ है। मैं अपील करना चाहूँगा अपने अपने छोटे भाइयों-बहनों से कि वे इस समस्या के हल के लिये आगे आयें और रचनात्मक पहल करें। खासकर प्रवासी भाई-बहन जो आज इस स्तिथि में पहुँच चुके हैं कि अपना योगदान दे सकें, जरूर आगे आयें। हमें एक नईं नींव की आवश्यकता है जो हमें प्राथमिक शिक्षा से ही शुरू करनी होगी। ऐंसे बीज बोने होंगे नौनिहालों के मन में कि वे अपना भविष्य यही तलाश सकें। मैंने स्वयंउच्च शिक्षा के फलस्वरूप गाँव में रहकर एक उदाहरण पेश करने की कोशिश भी की है ताकि आप सबको मेरा कहा उपदेश मात्र न लगे। 

हमें कुछ बिज़नेस मॉडल्स तलाशने होंगे जिस से हमारा युवा अपनी ज़मीन की तरफ आकर्षित हो। जवान, किसान और शिक्षक सभी को एक साथ आना होगा क्यूंकि यही क्षेत्र के मुख्य रोजगार रहे हैं तथा सँख्या में भी कमोवेश यही अधिक होंगे। पंचायत स्तर से ही शुरुवात करनी होगी सबको साथ आकर। चुनावी माहौल अब समाप्त हो चुका है अब आने वाले पाँच सालों की योजना बनानी होगी सभी को साथ मिलकर। कैश क्रॉप (नकदी फसल), डेयरी, पोल्ट्री आदि कुछ विकल्प किसान और जवान (सेवा निवृत) के लिए हो सकते हैं। जवान इसलिए कह रहा हूँ क्यूँकि सेवा निवृत होने के बाद जो पैंसा उन्हें मिलता है उसका इस्तेमाल भाबर के साथ साथ अपने क्षेत्र में भी होगा, तभी कुछ कर पायेंगे। जन प्रतिनिधि इस तरह के कामों में कैंसे मददगार होंगे, ये भी देखना होगा। सरकार की क्या क्या स्कीमें हैं, ये उन्हें आम आदमी तक पहुँचानी होंगी। खेती और जानवर हमारा इतिहास रहे हैं, इसकी हमें समझ भी है, जरुरत है तो योजित तरीकों की और आपसी तालमेल की। ग्राम सभा मिलकर अपना बिज़नेस मॉडल तैयार करे, चाहे डेयरी हो, कैश क्रॉप या और भी कुछ लेकिन काम सब एक ही करें (कम से कम एक गाँव) तभी बिज़नेस के लिये प्रोडक्शन हो सकता है। मिर्च, अदरक, हल्दी, प्याज आदि हम करते आये हैं अब इन्हे वैज्ञानिक विधियों से करने की जरुरत है। प्रोडक्शन होगा तो मार्केट खुद ही बनेगा, रोजगार आएगा, पलायन रुकेगा। 

साथ ही साथ सकारात्मक एवं रचनात्मक राजनीति में भी युवाओं को आगे आना होगा।  ये सारे काम एक साथ  करने होंगे क्यूंकि ये सब पूरक होंगे एक नया समाज निर्माण में। कुछ अनुज एवं अग्रज मिलकर दूसरी पहल भी कर रहे हैं उदाहरण के तौर पर "न्यूज़" दिल्ली द्वारा यंग उत्तराखंड के साथ मिलकर करियर गाइडेंस कैंप लगाना। ऐंसी किसी  पहल का स्वागत होना चाहिए और जिस भी सहयोग की जरुरत लोकल स्तर पर हो, उसे मुहैया करवाने में मैं व्यक्तिगत स्तर पर भी उपलब्ध हूँ। बस ऐंसे शिविरों का दायरा बड़ा हो ताकि सभी बच्चे लाभान्वित हो सकें। 

बातें और भी बहुत हैं, आप लोग आगे आयें, चर्चायें करें सोशल मीडिया, दिल्ली या अन्य शहरों में होने वाली कमिटी मीटिंग्स एवं अन्य उपलब्ध प्लेटफॉर्म्स पर भी। ब्लॉक कमिटी में हम लोग आगे की चर्चाएं करवायेंगे, तभी बात आगे बढ़ेगी। ज़मीन पर कुछ हो पायेगा। आप सबका आभार। अपने विचार जरूर भेजें। चाहे फिर यहाँ कमेंट्स में या व्यक्तिगत सन्देश में या फिर इ-मेल या पत्र द्वारा भी। जो भी उपलब्ध माध्यम हो।  रैबार या व्यक्तिगत रूप से भी मिल सकते हैं। 

शुभ!

संजय गौड़ 
क्षेत्र पँचायत सदस्य, बिलकोट
बवाणी। लूठिया।  बिलकोट। झुड़ुंगु
sanjay.gaur@hotmail.com

कार्यालय: हल्दूखाल 
पौड़ी गढ़वाल
२४६१६१ 

Tuesday, 3 June 2014

क्या "न्यूज़" जनता, जन प्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है??

क्या "न्यूज़" जनता, जन प्रतिनिधि और अधिकारियों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है??

मित्रो,

आगामी १८ जून को नैनीडांडा विकास खण्ड में पँचायत चुनाव होने निश्चित हो चुके हैं, शीघ्र ही नव निर्वाचित प्रतिनिधि हमारे सम्मुख होंगे। एक शुरुआत न्यूज़ ने क्षेत्र में 'अपील' बाँटकर की है। उद्देश्य ये कि क्षेत्र के जनमानस को जागरूक किया जाय और उसका जरूर कुछ न कुछ असर हमारे क्षेत्रीय मतदाता पर पड़ा होगा, ऐंसा मेरा पूर्ण विश्वास है। न्यूज़ के कार्यकर्ता प्रयासरत हैं इस बात को आने वाले समय में समाज जरूर मानेगा भी और साथ ही साथ आने वाला समय न्यूज़ को और बड़ी भूमिका में देखने की उम्मीद भी करेगा।

अब प्रश्न ये है कि क्या इस पहल को कुछ कदम और आगे ले जाया जाय। मैं ये भी मानता हूँ कि मात्र सुझाव देना काफी आसान है यहाँ अमेरिका में बैठकर लेकिन क्या पता इस चर्चा से कुछ बेहतर निकल के सामने आये, आप लोग चर्चा में जरूर शामिल हों और अपने विचार दें, जरुरी नहीं कि आप समर्थन ही करें। सकारात्मक आलोचना भी अच्छे परिणाम देती है ऐसा मैं सोचता हूँ। न्यूज़ का एक सदस्य होने के नाते एक सुझाव सभी मित्रों के सामने रखना चाहूँगा। सुझाव ये है कि,

"क्या न्यूज़ सामाजिक जागरण की इस पहल को कुछ और आगे ले जा सकता है"??

क्षेत्र की एक बड़ी परेशानी ये रही है की जनता को और अधिकतर जन प्रतिनिधिओं को भी सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी नहीं होती है जिसके अभाव में वे कुछ चालाक अधिकारियों की चपेट में आ जाते हैं। यहाँ मै ये भी स्पष्ट कर दूँ कि सारे अधिकारी इन कामों में शामिल हैं, ऐसा नहीं है, लेकिन ये भी सच है कि बहुलता ऐंसे लोगो की जरूर है। आने वाले परिणामों के बाद क्या एक नई शुरुवात की जा सकती है जिसमें सभी लोगों के सहयोग से एक ऐसा कार्यक्रम ब्लॉक स्तर पर किया जाय जिसमें जनता को जानकारी भी दी जाय, परिचय भी हो जन प्रतिनिधियों एवं ब्लॉक अधिकारियों से और कुछ सवाल जवाब भी। ये एक बहुत ही सकारात्मक कदम हो सकता है जिसमे सारे प्रतिनिधि आने वाले समय में वे क्या करने की सोच रखते हैं ये भी लोगों को बतायें और मशीनरी इसमें कैसे सहयोग करेगी ये भी स्पष्ट हो। क्यूंकि दोनों पक्ष साथ होंगे तो निष्कर्ष भी निकलेगा और जनता सवाल पूछना भी सीखेगी। साथ ही साथ सरकार की क्या योजनाएं हैं उसकी जानकारी न्यूज़ टीम जनता को दे सकती है और इसमें ग्रास रुट लेवल से नए लोग भी इस कार्यक्रम के दौरान जोड़ सकती है। सरकारी योजनाएं जैसे नरेगा, बी पी एल, विधवा पेंशन आदि जो भी सेवाएं हैं। थोड़ा बहुत लोन आदि की भी सतही जानकारी। इसमे आप लोग आगे अन्य विषय भी जोड़ सकते हैं। ऐसा कार्यक्रम अगर होना निर्धारित होता है तो मैं अपनी सेवाएँ देने को भी तत्पर रहूँगा।

आइये साथ मिलकर क्षेत्र में एक रचनात्मक वातावरण बनाएँ जिस से समाज में एक नया उत्साह जागृत हो। यहाँ ये भी स्पष्ट रहे की ये पूर्णतया सकारात्मक पहल होगी जिसका किसी से व्यक्तिगत रंजिश निकालना या राजनैतिक हल साधना बिल्कुल भी उद्देश्य नहीं होगा। एक ऐंसी पहल जिसके दूरगामी परिणाम होंगे ऐंसा मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ। क्या हम ऐंसा कर सकते हैं??

विजय गौड़  

Sunday, 25 May 2014

भला दिन औंणा छन!!

भोल म्येरा मुलुक मा एक नै सरकार बण नी च।  जु बि कुच मैनो बिटि भौत सा माध्यमों से सूचना मिलि, वु सब बटोलि एक कविता लिखणा कि कोसिस च, व्यँग थैं व्यँग क तरह से पाठक ल्येला यनि आसा च। कोसिस यनि च कविता मा कैका समर्थन य विरोधकि बास नि औ। 

शीर्षक:  भला दिन औंणा छन!! 

नेता जि बनि-बनि का सुपन्या छन दिखौणा,
देस मा मनख्यों कि मुरदि आस छन जगौणा।
गौं-गल्यों, सैरों मा त कुज्यणि जु बि हूणु होलु,
फेसबुक, ट्विटर, प्रिंट अर टी बी त यनि बखौणा छन,
बल मुलुक मा भला दिन औणा छन।।  

आस यनि कि कलजुग अर त्रेता मा 'कम्पटीसन' च हुयुं,
कि तुमरि 'जी डी पी' से हमरि भलि होलि।
तुमुन रावण मुक्त समाज कु मॉडल दये छयु,
हमुन बि 'हातमुक्त' भारत कनाखुणि क्य-क्य नि बोलि।
जरूर वूंकु राजतिलक मुनि विस्वामित्र जि न कै होलु,
यिख त साक्सात् 'रामदेव' 'सात मुल्कौ' कि पिठै लगौणा छन,
बल मुलुक ………………………………………… 

क्वी बुना छाया कि रामराज न 'आमराज' चयेणु,
अज्क्याल वुंका 'आम' बि कमि छन दिखेणा।
कुच जात-पात कु 'लॉलीपॉप' छा बिचदा,
वुंकु जोगम बि चुसिण्या, चुसेण्या।
परजा आर-पार का 'मूड' मा दिख्येणि,
अब कारा काम निथर,  डुण्डा डौणा छन। 
बल मुलुक ………………………………………… 

बल सब्यों कु दगड़ु होलु अर सब्यों कु विकास,
भुयां कतै नि देखा,  देखा ऐंच-अगास।
मस्जिद, मंदिर ह्वै जालि अर मंदिर-मस्जिद,
हर घर खुसहाल, क्वी मन न उदास।
बक्कि त भोल बगत ई बतालु कि स्वीणा सच होला,
य भैजि छुयों का चखुला उड़ोंणा छन। 
बल मुलुक मा भला दिन औणा छन।।  

@ विजय गौड़ 
२५ मई २०१४ 
नै सरकार गठन कि पूर्व संध्या पर    

Sunday, 30 March 2014

मेरे देश तुझे बहुत आगे बढ़ना है !!

तू निसंदेह बड़े बदलाव के पड़ाव पे है,
अभी और बड़ी ऊंचाइयों पे चढ़ना है। 
कुछ हुआ है, काफी कुछ होना बाकी है,
मेरे देश, तुझे बहुत आगे बढ़ना है।।

तू वो सैलाब है,
जिसे थामने की हिम्मत न कर सका कोई,
तुझे थमना भी नहीं,निरंतर बहते रहना है। 
बहुत कोशिशें तेरा बहाव बदलने की होंगी,
तू अपना लक्ष्य देख,
बाकी सब में नहीं पड़ना है,
मेरे देश, तुझे बहुत आगे बढ़ना है।।

तू वो समंदर है,
जिसमें न जाने कितनी नदियां हैं समाहित,
तूने पानी में ना भेद किया, ना आगे करना है। 
आसान नहीं है अच्छाइयों में जिन्दा रहना,
तुझे इस 'पहचान' की ज़िन्दगी के लिये लड़ना है,
मेरे देश, तुझे बहुत आगे बढ़ना है।।

संसार टकटकी लगाये आज तुझे देखता है,
तुझे उन उम्मीदों पे खरा उतरना है। 
तुझमें सामर्थ्य है दुनिया के प्रतिनिधित्व की,
तुझे ये विश्वास हर मानस पे गढ़ना है। 
मेरे देश, तुझे बहुत आगे बढ़ना है।।

कॉपी राइट @ विजय गौड़  
३० मार्च २०१४ 


Friday, 7 March 2014

मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ !!

दग्ड्यौ हम लोखु न जै उद्देश्य क वास्ता य संस्था NEWS (नैनी एकता वेलफेयर सोसाइटी) सुरु करीं च वैथें एक ढवण्या भासा म लिखीँ कविता क द्वारा सब्यों तलक पौंचाणै कि कोसिस कनु छौँ, आस करदु कि जु संदेस हम सबि भै-बंद, दीदी-भुल्यों, दाना-सयणों तलक पौंचाण चंद्य़ा, वू जरुर पौंचळु अर भंडी से भंडी लोक याँ से जुड़ेला।आज क समय म ज्व भासा प्रचलित च वेकु इस्तेमाल कना कि कोसिस मिन करीं च। 

@ विजय गौड़ 


मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ,
द्वी ब्येलि कु गफ्फा कमाने के बाद बचे समय को,
मैं अपने गौं-मुलुक के लिये "यूज़" करना चाहता हूँ,
मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ।।

हाँ! मिथै कुच बणना खुणि अपना मुलुक छोड़ना पड़ा,
पण मुलुक तो सरैल ने हि छोड़ा,
मन तो सदनि वुखि रहता है,
भोल म्येरि औण वलि पुश्त का सरैल अर मन द्वी वुखि रहें,
मैं ऐंसी कोई राह "चूज" करना चाहता हूँ,
मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ।।

मि बि वी अन्न खा रहा हूँ 
जो बड़ि-बड़ि छ्वीँ करने वाले चकड़ैत खाते हैं,
बस तनि कोरि गप्प सूणी कि मैं तुमारा हो जाऊँ,
मि यनि सोच को "रिफ्यूज"करना चाहता हूँ,
मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ।।

मि जणदु छौं कि म्येरा हि जनि आप बि सोचते हैं,
त फेर यखुलि-यखुलि किलै? चला दगड़ि चलते हैं,
कनक्वै रोक पायेंगे पलायन?कनक्वै जुटायेंगे रोजगार?
मैं ये फर आपके "व्यूज" चाहता हूँ,
मैं "न्यूज़" बनना चाहता हूँ।।

copyright@ Vijay Gaur

Tuesday, 24 December 2013

"बौल्या" बणण तुम छोडि दया।

ब्यो-पगिनि अर गों-गल्यों मा, 
अगड़ी-पिछड़ी अटगण छोडि दया। 
ब्वल्युं माना, "ब्यो" कि सोचा, 
सिन "बौल्या" बणण तुम छोडि दया। 

मनै क्या च, 
ग्वाया लगाणु रांदु लोलु जखि-कखि,
कबि इनै त कबि उनै कि रान्दि येकि दयखा-दयेखि,
द्वी-दिन कि प्रीतै रीत कि हवा चलणि तेज अब,
यनि हवा मा तुम लोलाओ जरा उड़ण छोडि दया,
ब्वल्युं माना, "ब्यो" कि सोचा,
सिन 'बौल्या' बणण तुम छोडि दया, 

गौं - बरात्युम, 
छजा मा द्येखि, उड़दु मन कख-कख त्येरु,
मि बि आज-यिखी बणि जौं ब्योला, बुल्दु मन जखि-कखि त्येरु,
हौरों क ब्यो मा, सिन्नी ख्याल-ख्यालों मा, 
मन कु डोला डोलुणु अब छोड़ि द्या ,
ब्वल्युं माना, "ब्यो" कि सोचा,
सिन 'बौल्या' बणण तुम छोडि दया,    

कब तलक यन बगणा रैल्या, अफि, अफु थैं ठगणा रैल्या,
ये मन थैं मन्चलु कैरि -कैरि, झूटा सुपन्या पलणा रैल्या,
सुपन्या छोड़िकि, सच मा आवा,
सुद्दि गाणि करणि तुम छोड़ि द्या,
ब्वल्युं माना, "ब्यो" कि सोचा,
सिन 'बौल्या' बणण तुम छोडि दया,    

विजय गौड़ 
Copyright @ विजय गौड़ 28.08.2013 
संसोधन : २३ दिसम्बर २०१३ 



Friday, 22 November 2013

' जग्वाल '

तू आज ऐलि या भोल ऐलि,
मै थैं त्येरि जग्वाल रैलि,
तू आस म्येरि, सूण बात म्येरि,
त्येरा औण से हि बग्वाल ऐलि। 
तू आज ऐलि या भोल … …

बालापन बिटि ज्वा मन मा छैई,
वा स्वाणि, अजाणि मुखुड़ि छै तू,
सुचदि रयों यु, मुख मा नि ऐई,
म्येरु ज्यू, पराण, जिकुड़ि छै तू,
जो बोलि नि मिन, वे बींगि जरुर,
त्वि रूढ़ि, ह्यूंद, बस्ग्याल लोलि,
तू आज ऐलि या भोल … …


ज्वनि का छौंदा तू ऐ जैई,
अर ऐकि बतैजा कि सच छै तू,
बैरयों का गौंवा कि न कै जैई,
म्येरु ठटा लगाला कि कख गै तू,
मि बाटू हेरुणु ये विस्वासन छौँउ,
म्येरि प्रीत त्येरा मन बि उमाल लैलि,
तू आस म्येरि ………… 

@विजय गौड़
२२ नवम्बर २०१३ 
१० बजि सबेर,
मॉडेस्टो, कैलिफोर्निया।