Monday, 21 January 2013

"नैनीडांड विकास संघ"

दयेखा नैनी डांड मा एक नयि सुबेर हूणी च,
नना -तिना, दाना-सयाणों कि एक नई पौध औणी च।

सब्यों का मन्न मा कुछ कर-गुजरणा कि बात च,
जग-जगों छेत्र विकास खुणी लगणी लंगात च। 
अहा! नैणी, बुंगी, दीवा, भौना, धुमा सब्बि दैणि हुयान,
अर अपणा नौन्यालु थैं औंगाल बोट्टी बुनान, 
कि म्येरा नौन्यालु कु यु कदम, म्येरा छेत्र का विकास खुणी च।   
दयेखा नैनीडांड मा एक नयि सुबेर हूणी च,

आज क्वी न रौत, न नेगी न बलूणी च,
हरेक कि बस एक हि मनसा एकि मनौणि च,
लगावा रै मर्दों जोर, और पौंचा दयेल्यूं-दयेल्यूं,
तुम थैं आज जलमभूमि भटयोणि च,  
दयेखा नैनीडांड मा एक नयि सुबेर हूणी च,

बालापन, ज्वनि अर बुडापू कु यु मिलाप क्वी राजनीति नि च,
यान्कू आदि अर अंत केवल अर केवल, विकासनीति च।
छेत्र जागरूक कना खुणी, हमन रांका उठयाँन,
अपणा व्यक्तिगत फैदा, पैलि कूणों चुटयाँन,
मुल्कै कि प्रगति हि सब्यो कु घ्यू, दूध अर नौणी च,
दयेखा नैनीडांड मा एक नयि सुबेर हूणी च....

जग-जगों मन्ख्यों का मेला लगणांन,
दीदी-भुली, काकी-बोड़ी सब छेत्र विकास मंगणान। 
अर बुलंदी कु नौ धर्युं नैनीडांड विकास संघ,
या त्यरि हि ना, म्यरि हि न, हम सब्यों कि जंग।
आवा अर जुड़ा यीं विकास यात्रा से,
जु बस हमुसणी हि ना, हमरी नई पुश्तों खुणी च।
दयेखा नैनीडांड मा एक नयि सुबेर हूणी च...

विजय गौड़ 

Saturday, 29 December 2012

दामिनी!! निर्भया!!! अमानत !!!



क्वी दामिनी बुन्नु, क्वी निर्भया त क्वी अमानत!
वीन त जाणु छौ और वा चलि भी ग्ये,
वाह रे म्येरा देस, म्यरु समाज,
त्वै परैं बस अर बस,  लानत!!

जै देस मा माँ-भैण्यो कु सम्मान नि,
जै देस मा इंसान, इंसान नि,
दरिंदा जख देखा, जना देखा 
लुटणा छन, नुचणा छन,
आखिर कख हर्चणि ये समाज बीटिंन इंसानियत,
क्वी दामिनी बुन्नु, क्वी निर्भया त क्वी अमानत!

व्यवस्था कु नौ बिवसता ह्वै ग्ये अज्क्याल,
शासन मा सांस नि रै ग्ये, सब्यों न दयेख्याल,
निर्दोस हथकडयों मा जकिड्यू च,
दोषी खुल्ला घुम्णो अर हैंकु शिकार खुज्णु च,
कखी वर्दी मा त कखी बिन वर्दी,
खून चुसणी हैवानियत 
क्वी दामिनी बुन्नु, क्वी निर्भया त क्वी अमानत!

नेता बुन्नान पुलिस ठिक नि 
पुलिस बुन्नी समाज ठिक नि,
जु मुंड उठाणु वेमा डंडा बर्स्येणा,
बर्फिलू पाणि कि वौछार बुन्नी, त्येरि जगह यिख नि,
तुमरू राज-पाट बस दयेली भितिर तक हि च,
बक्की सर्या देस पैंसा वलों कि मिल्कियत,
क्वी दामिनी बुन्नु, क्वी निर्भया त क्वी अमानत!

हे विधाता! त्वै त्येरा सौं, ये मुलुक अब बेटी नि पैदा होण दये,
सच बुन्नु छौ अब मिथै त्येरा नौ पर भि विस्वास नि रै ग्ये,
मिन सूणी त्रेतायुग मा रामराज छौ, सब सुरक्षित छाया,  
पर समय की पराकास्ठा दयेखा, 
कलयुग आन्द -आन्द 'रामसिंह' सबि मर्यादा भूलि, अफ़ी बलात्कारी ह्वै ग्ये,
सडकों मा जख देखा भेड़िया हि भेड़िया,
मानवता झणी कख व्है नदारद,
क्वी दामिनी बुन्नु, क्वी निर्भया त क्वी अमानत!
वीन त जाणु छौ और वा चलि भी ग्ये,
वाह रे म्येरा देस, म्यरु समाज,
त्वै परैं बस अर बस,  लानत!!

विजय गौड़ 'शर्मसार'
29/12/2012

Monday, 3 December 2012

"प्रवासी"


कैथैं सुणों यीं कथा, कैमा लगौं य व्यथा,
म्येरू ज्यु ब्वनु सब्यों बताणो,
क्वी त बोला दी!!!!......बथा।

मिन बि ल्ये छौ यु जलम,
स्यीं स्वाणी धरती मा,
मिन बि बाँचि छन आखर-पहाड़ा,
वीं नीली-ख़ाकी स्कुल्या बरदी मा,
फिर बगतन छुड्ये दये मुलुक,
झणी किलै! मै नि पता!!!!
म्येरू ज्यु ब्वनु सब्यों बताणो,
क्वी त बोला दी!!!!......बथा।

मजबूरी मिथें बिरणा मुलुक लि ऐ,
न यिख, न उख, क्वी बि त अब अपणु नि रै,
म्येरा अपणा हि अब मै "प्रवासी" बुलान्दन,
बेर-बेर म्येरि मजबूरी याद दिलान्दन,
"प्रवास" कैसणी भलु लगदु?
तुमि बोला, तुमि बता??
म्येरू ज्यु ब्वनु सब्यों बताणो,
क्वी त बोला दी!!!!......बथा।

स्यु छौं आज बिना "पछ्याण" कु जीणू,
पहाड़ी ह्वैकि बि पहाड़ नि रैणु,
लाटु मन्न पहाड़ों मा हि रिन्गणु,
निर्दयी बगत मनै बात नि बिंगणु,
प्रवासी से निवासी होण कि मंसा,
पूरी होलि कि ना, नि पता,

कैथैं सुणों यीं कथा, कैमा लगौं य व्यथा,
म्येरू ज्यु ब्वनु सब्यों बताणो,
क्वी त बोला दी!!!!......बथा।

विजय गौड़ 
सर्वाधिकार सुरक्षित।
पूर्व प्रकाशित 

Tuesday, 13 November 2012

"बारा सालौ उत्तराखंड"


पैली बि राति छै, अज्युं बि रात हि च,
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!!

अपणों न बोलि यनु होलु,
बिरणों न बोलि तनु होलु,
नयु राज होलु त झणी कनु-कनु होलु,
छ्वीं त सब्यों न बड़ी-बड़ी करिंन!
विकासे नौ ढाँके तीन पात च,
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!!

जनता अज्युं बि रेल सुणी जलक्येणी,
रेल त कखी सरक्ये नि च, लोग 'रेल पुरुष' ह्वै ग्येनी,
सड़क त सरकरी कागज़ों मा हि बणदन,
लोग नमान अज्युं बि उकाल-उन्दार हि नपणन,
जुन्यली रातै आस, पर हुयीं औंसी रात च!
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!!

मिन सुणी, हम गँगा मैति छाँ!
पण पाणि नौ पर बस सूखि गौलि च,
सच्ये! नौनि का मैत्यों पूछ कब छै,
रौली म्येरि पण पाणि गुसैं क्वी हौरि च,
मुलुक मा जख द्येखा, बस डामों कि लंगात च!
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!! 

जै धरती बिटिन कबि जलधार बगदी छै,
अज्क्याल उख बिटिन, मनखी बगणांन,
जौं थाडों म कबि बचपन अटगदू छौ,
अब सुनक्याल हुयान, अर छिप्वडवा-बिरला रिन्गडान,
प्रवास थमेनौ नौ नि लीणु,यु कनु बकिबात च!
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!! 

पैली बि राति छै, अज्युं बि रात हि च,
एक-द्वी सालै ना, या बारा सालों बात च!!

विजय गौड़ 
सर्वाधिकार सुरक्षित         

Friday, 9 November 2012

सौंजण्या!!!


दगीड्यों!! येबगत अर्जेंटीना का ब्वेनोस आइरिस मा एक होटल मा बैठ्यु छौं!! अबि-2 बरखा बंद व्है और बड़ी स्वाणी हवा चनी च!!यनु मौसम मा अपणी सौंजण्या कैथे नि याद आलि!! मिन सोचि यनि बात सब्यों दगड़ी कबि न कबि त होंदी होलि, त सब्यों थें सुणाणु छौं अपणा मन का स्यी उदगार!!!!      

सौंजण्या!!!  

त्येरी-म्येरि उठड्यों मा, मिठा-मिठा गीत सौंजण्या!!! 
अग्ने-अग्ने हिटणा हम, पिछ्नै औंदि प्रीत सौंजण्या!!!  

पैलि-पैलि यीं माया की या पैलि रात खुदयांदी रैलि!
माया की यीं मौल्यार माँ, हुयीं छ्वीं-बात खुदयांदी रैलि!
ज्यु ब्वनु या सरया ज़िन्दगी, यनि कटये, यनि बीत सौंजण्या!!!  
अग्ने-अग्ने हिटणा हम, पिछ्नै औंदि प्रीत सौंजण्या!!!  

आंख्यों मा त्वी रैंदी सदानी, आंखि मि जमा बि बुजदू!
जरा मि स्युं आंख्यों से, अपणा मनै बात पूछि ल्यूं!
त्येरी यनि छ्वीं बतों न, म्यरु मन ल्ये जीत सौंजण्या!!!         
अग्ने-अग्ने हिटणा हम, पिछ्नै औंदि प्रीत सौंजण्या!!!  

छ्वटा-छवटा यि दिन-रात, झणी कथगा छ्वीं छन बचीं!
जल्दि च क्ये बात कि, स्वाणी सरया ज़िन्दगी बचीं!
मन बुन्नु यन्नी छुयों-छुयों मा, बगत जा यु बीत सौंजण्या!!!     
अग्ने-अग्ने हिटणा हम, पिछ्नै औंदि प्रीत सौंजण्या!!!  

त्येरी-म्येरि उठड्यों मा, मिठा-मिठा गीत सौंजण्या!!! 
अग्ने-अग्ने हिटणा हम, पिछ्नै औंदि प्रीत सौंजण्या!!! 

विजय गौड़ 
सर्वाधिकार सुरक्षित 

Wednesday, 7 November 2012

"मैंगै"(महँगाई )


न क्वी दिन-बार, न रंत रैबार,
अर बिन बुलयाँ, म्येरू मैमान ह्वै ग्ये!
मैंगै!!! लोलि तू फेर ऐ ग्ये।

कबि आटु, कबि चौंल त कबि तेल मा आणि छै,
हे निर्दयी! तू त अज्क्याल पाणि बि नि छोड़ जाणि छै!
जु पाणि एक बगत छम्वाटोन छौ पियेंदु,
वेका घुग्गा बि तु टैक्स बणी बैठ जाणि छै,
न क्वी सरम-ल्याज, न कैकु लिहाज!
बिरणा मुल्कै नौनी सि ह्वै ग्ये!!
मैंगै!!! लोलि तू फेर ऐ ग्ये।

न घ्यू दूधै छरक,न गोर बखरों का खरक,
सरग त बरखणु बिसिर ग्ये, अब त्येरी हि हुई बरखा-बरख!
सारयों मा नाज अर क्यारों मा साग,
जरा सि ह्वै ग्ये त, वे भग्यानौ भाग!
न क्वी धै! न ढौ-ढसाग,
पहाडयों पर देसी लसाग सि ऐ ग्ये!!      
मैंगै!!! लोलि तू फेर ऐ ग्ये।

आखिर क्वी दीन-इमान बि होण चयेणु च,
यनि रक-रक ब्यखुनी-फजेल नि औण चयेणु च,
अफु थैं सिन्नी ब्योलो बामण चितांदी!!
त स्यों नेतों का घौर किलै नि जांदी??
न क्वी कट्वरा, न रसिदै किताब,
जै कै का द्वार भटकै, भितर कुच्ये ग्ये!!
मैंगै!!! लोलि तू फेर ऐ ग्ये।
मैंगै!!! लोलि तू फेर ऐ ग्ये।


विजय गौड़
सर्वाधिकार सुरक्षित 
 07/11/2012             

Tuesday, 30 October 2012

"माया कु रैबार"


कै बिना रयेणु नि, गफ्फा अब खयेणु नि,
रात-दिन आंखि बिन्जी रैन्दिन,
बोला! क्या यिथैं हि 'माया' बोदिन??

रूम-झुम वूं छीटों मा, बस्ग्याल का च्वींटों मा,
दयेखी छै पैलि बार,
ऐ ग्ये छै जिकुड़ी मौल्यार,
ऐ  छै जब सामणी,झणी क्या मै ह्वै ग्येई?
स्वीणों मा त छै हि छै, म्येरा वीणा भि ल्ये ग्येई!!
रात-दिन आंखि बिन्जी रैन्दिन,
बोला! क्या यिथैं हि 'माया' बोदिन??

कनि अजाण सि बात च, जन कि दिन मा हि रात च,
अफ़ी -अफ़ी बच्यांदु छौं कै बार,
क्या यी च 'माया कु रैबार'
दयेख्दु छौं जना भि अब तू हि तू दिख्येन्दी छई,
जाण-पछ्याण चा ह्वै नि च, पर तू अपणी ह्वै ग्येई!!
रात-दिन आंखि बिन्जी रैन्दिन,
बोला! क्या यिथैं हि 'माया' बोदिन??

म्यरु ज्यु - म्यरि ज्यान,  त्वी बता! त्वे कख खुज्याँण?
खोजि मिन त्वे सब्बि गों-बज़ार,
कख करु त्वे स्ये सौं- क़रार,
त्येरी माया कु असर, इथगा मै पर ऐ ग्येई,
दुन्या-दारी सर्या बुन्नी, स्यु नौनु बौल्या ह्वै ग्येई!!

कै बिना रयेणु नि, गफ्फा अब खयेणु नि,
रात-दिन आंखि बिन्जी रैन्दिन,
बोला! क्या यिथैं हि 'माया' बोदिन??  

विजय गौड़ 
30/10/2012
सर्वाधिकार सुरक्षित....
  

Sunday, 28 October 2012

लाटि माया!!!!!


जै खुज्याणो बाटों का गारा कुर्च्येनी,
वा सदानि बाटु बिरड़ान्दी रैई!
मी भितिर हि भितिर फुकेणु रौंऊ,
वा खित हैंसी, हौर सुल्गांदी रैई!

मिन मनै गेढ़ वीमा खोलिनि,
वा गारा सि छमड़ान्दि रै,
मिन दिलै बथ वीमा बोलिनी,
वा ज़मना थैं बथान्दी रै!

वींका बाना अपणा, बिरणा ह्वै ग्येनी,
वा बिरणों थैं अपणान्दी रै!
मी वीं जनै हिटदु रौं,
वा फुन्डों-फुन्डों जांदी रै! 

आज स्यु हुयू क्वीलु सि कालु,
वा ग्वारों खुज्यांदी रै!
मी भि बालपन मा गोरु हि छौ ,
या ज्वनी  कालु बणान्दी ग्ये!!
या ज्वनी  कालु बणान्दी ग्ये!!     

विजय गौड़ 
सर्वाधिकार सुरक्षित....

Tuesday, 18 September 2012

"पहाड़ी नि छै त कु छै तू??"

क्योकु छै अपणी पछ्याण लुकाणु,
क्योकु छै अपु पर सवाल उठाणु,
क्योकु छै अपणो से दूर तू जाणू,
क्योकु छै झूटि सान चिताणु,
अन्वार मा पहाड़ लिख्युं जैकू,
पहाड़ी नि छै, त कु छै तू?

कख छै बस्ग्यली पाणि सि बगणु,
कैकु छै तू घामपाणि सि ठगणु,
क्योकु  छै बिरणा मुलुक तू भगणू,
क्योकु चौका-तिबारयु स्यु मन्न नि लग्णु,
छुयों मा पहाड़ लिख्युं जैकू,
पहाड़ी नि छै, त कु छै तू?

क्योकु  तेरु नौनु पहाड़ी नि बिन्ग्णु,
क्योकु  तेरा गों वू अपणु गों नि बुल्णु,
क्योकु  दाना ब्वे-बाबों का बारा नि सुच्णु,
क्योकु  त्वे से गोर-बखरू नि खुच्णु,
पैरवाक मा पहाड़ लिख्युं जैकू,
पहाड़ी नि छै, त कु छै तू?  

आज त्यरू पहाड़ त्वे धै च लगाणु,
तू वेकु हि छै त्वे बडुली लगाणु,
कख छै लोला तू बिरड़दू जाणू,
त्वैकू ठंडी हवा, ठंडो पाणि धर्युं,
अर तू छै स्यीं गरम लू तख खाणु,
गरमन हाल बेहाल हुणू  जैकू,
पहाड़ी अर बस पहाड़ी छै तू......

विजय गौड़ 
सर्वाधिकार  सुरक्षित
१८.०९.२०१२

Public Views:

Jagpal Rawat बिलकुल सही बात गौर भै, हम थै अपरू पैछान नि छुपान चैन्द. सही बात च कि "पहाड़ी नि छै, त कु छै तू?" बहुत बढ़िया ............. मन खुश कर दिया... बस लिखदा राव अर हम थै इन चटपटा कविता सुनाण राव....


Friday, 14 September 2012

अपणो मा बिराणी हिंदी!! : हिंदी दिवस पर विशेष..

अपणो मा बिराणी हिंदी!!  : हिंदी दिवस पर विशेष..

मोहम्मद इकबाल न बोली छौ कि, "सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा"
वे हि हिन्दुस्तान मा आज बल "हिंदी दिवस" हुणो च,
जख सहरों मा ता अग्रेजी बुल्ये जांदी और गाँव मा छेत्रिय भासा,
अपणो मा बिराणी हिंदी!! अज्क्याल त्वैथैं क्वी नि सुन्घणो च...

६५ साल हवे ग्येनी त्येरा देस थैं स्वतंत्र हुयाँ,
पर क्या कन्न ६५% जनमानस भि तिथैं राष्ट्र भाषा नि मनणू च,
त्येरा बुल्दरो कि गिनती भि रोज उंदार हि लग्यीं,
अर सौत अंग्रेजी न यनु वातावरण बणे याली,
कि लाचार मन्खी वीं बिना जमा भि नि जै सकणू च...
अपणो मा बिराणी हिंदी!! अज्क्याल त्वैथैं क्वी नि सुन्घणो च...

यु सच च कि तेरु नौ कु उदगम हिन्दुस्तान से हि हुयू च,
पर लोली "हिन्दुस्तान" अब रै कख ग्ये?
अंग्रेज जरुर ये देस से चली ग्येनी,
पर तेरी पछ्याँण हर्चानै कु हि त देस कु नौ "इंडिया" करयु च..
अपणो मा बिराणी हिंदी!! अज्क्याल त्वैथैं क्वी नि सुन्घणो च...

मि भि पैल अपणु सृजन त्वैमा हि करदू छौ,
पर पढ़दरा हि नि मिलिन त मेरु कविमन भि त्वे से बौग सरणु च..
मिन अपणी ब्वे कि भासा मा सृजन कि सोचि अब,
जैकू हाल भि कमोवेस तेरु हि जनु हुयू च...
वी थैं परदेस मा क्वी नि पुछणू, अर त्वैथैं देस तिरस्कृत करणु च..
अपणो मा बिराणी हिंदी!! अज्क्याल त्वैथैं क्वी नि सुन्घणो च...

विजय गौड़ 
१४ सितम्बर २०१२ 
सर्वाधिकार सुरक्षित...

Public Views:







Wednesday, 5 September 2012

मास्टर जी दिवस !!!!

मास्टर जी दिवस !!!!



आज सबेर-२ मिन मदिन दादा कु नौनु थैं पूछी,
रे बेटा! बडू खुश से दिखेणु, स्कूल नि ग्ये?
नौनु मी परैं खित्त हैंस और बुल्दु यो च,
कि काका तु भि लाटु हि छै,
आज ५ सितम्बर च, जैथैं मास्टर जी दिवस बुल्दन रै!!!

मिन जरा खिस्ये कि फिर पूछी,
कि छुट्टी हौरि भि हुन्दन पर तु इथगा खुस नि दिखेंदु छै?
नौनु बुल्दु कि काका यन्न ता साल मा भिंडी मास्टर जी, मॉसट्यानी जी दिवस हुन्दन,
पर आज कु दिन ख़ास च, जैमा मास्टरों दगडी नौनो कि भि छुट्टी होंद भै!!   

मिथें नौना कि बुद्धि पर सच मा आश्चर्य हवे,
अर अपणा ज़माना कि याद ऐ ग्ये,
कि कथ्गा लाटु छौ वू ज़मनु, 
जब द्वी मे से एक मास्टर ता "अध्यापक दिवस" हि मनांदु छौ,
पर हम लाटों थैं कभि ध्यान भि नि ऐ....

सच मा अब नौन्याल "हाई टेक" हवे ग्ये,
मिथें अपणा पहाड़ कु भविष्य "ब्राइट" होंद दिखेणु लै ग्ये,
ऐक ज़मनु छौ जब दूर-२ तक साधन नि छया,
पर अब म्यरु सरया उत्तराखंड साक्षर हवे ग्ये...
सरया उत्तराखंड साक्षर हवे ग्ये.......

"विजय गौड़" 
शिक्षक दिवस पर विशेस
५ सितम्बर २०१२..
सर्वाधिकार सुरक्षित...

Thursday, 30 August 2012

सोची छैयी साथ त्येरु-म्येरू होलू!!!!


सोची छैयी साथ त्येरु-म्येरू होलू ज़िन्दगी भर कु,
सुपन्यु छैयी त्येरा संग मा देख्युं एक नयुं घौर कु,
सोची छैयी साथ....

ब्यालि त्वे थैं दयेखी मिन चौक्ये तिराली,
जन ब्वनी होली तू मै धैरी दये समालि,
औंगाल तिन छै वा मै पर ब्वटीं बिना कै डौर कि..
सुपन्यु छैयी त्येरा संग मा देख्युं एक नयुं घौर कु.....

सुचणी होली तू या कनि माया म्येरी,
हाँ! बौल्या हवेग्युं मी त्येरु बाटु  ह्येरी-हेरी,
रात दिन मन मा ख्याल त्येरु रांद ये भौंर कु,
सोची छैयी साथ त्येरु-म्येरू होलू ज़िन्दगी भर कु.....

आंखि दयेखदी रैग्यीं,  बाटु  हेरदी रैग्यीं,
लाटा मन कि वा तीस, तीस हवे कि रैग्यी,
सुपन्यु म्येरू झणी किलै यु ह्वैग्ये आज कै हैन्का कु,
सोची छैयी साथ त्येरु-म्येरू होलू ज़िन्दगी भर कु.....
सुपन्यु छैयी त्येरा संग मा देख्युं एक  नयुं  घौर कु......

"विजय गौड़ "सर्वाधिकार सुरक्षित...


Wednesday, 29 August 2012

हिटणु रै!!!



हिटणा कु दियीं खुट्टी,
रै मनखी हिटणु रै!!!
बुटणा कु दियीं च स्या मुट्ट,
तू बुटणू  रै!!!

कबि उकाल - कबि उंदार सि बाटू ज़िन्दगी कु,
ये थैं तिर्छोड़ी कनै कि हिकमत करणु रै!!!
हिटणा कु दियीं खुट्टी.........

उन्द अटगणे कि लगिं होड़ ये मुलुक अब,
यिक्खि रैकि जरा पाड़-पाड़ी तू बंचणु रै!!
बुटणा कु दियीं च स्या मुट्ट........

सच थैं अब जरा भिंडि दबाणु स्यु झूठ यिख,
द्वी घड़ीम पलट्येलु यु ढुंगु, बाटु हेरुणु रै!!!
हिटणा कु दियीं खुट्टी.........

क्वी धक्यालू अग्नै त क्वी पिछ्नै त्वैई,
अपणा- परया पछ्याणि स्ये मन मा लिखणु रै!!!
बुटणा कु दियीं च स्या मुट्ट........

छंट्येलु अँधेरु, होलु उज्यालु सिंनक्वली,  
ढान्डू-कांडों मा तब तलक तू सकणु रै!!! 
हिटणा कु दियीं खुट्टी.........

ज्योंन मनखि कि वेन दियीं त्वै कना कु कुच, 
वेकु बुल्युं कैयालि? अफु स्ये पुछणु रै!!!
बुटणा कु दियीं च स्या मुट्ट........

खैरि-विपदों कि लम्बि लंगात जब दयेखा तब,
लगै कि अड्ड दूर धार पोर स्यों ठेलुणु रै!!!
हिटणा कु दियीं खुट्टी.........

ब्वै-बाब रैनि कैका सदानि दगडि यिख,
मि बि छ्वरयों, भोल तु बि छ्वरयेलि, बिन्ग्णु रै!!! 
बुटणा कु दियीं च स्या मुट्ट........

कबि त मुंड मलसणों आला पित्र त्येरा ड्यार बी,
मोल-माटन लीपि खान्दम वुन्कू बाँठु बि धरणु रै!!!
हिटणा कु दियीं खुट्टी.........

विजय गौड़
22.08.2012 (11.50 PM)
(संसोधन दिनांक ०७/०८/२०१३, पूज्य पिताजी को मरणोंपरांत समर्पित) 
सर्वाधिकार सुरक्षित

Public Views:


Satendra Rawat5:24pm Aug 29
बहुत बढ़िया कबिता विजय भाई, विधाता न त्वेथई खास कनो भेज्युन रे मनखी सोचुणू रेई, वेकु दीयों कैयाल तिल, आपसे पूछ्णू रै!!!!

Parashar Gaur5:21pm Aug 29
bahut sunder
सुनीता शर्मा4:51pm Aug 29
भोत सुंदर अर सही लिख्युं च यें रचना मा बधाई भाई जी !
विजय गौड़
5:03 PM (45 minutes ago)
धन्यबाद सुनीता जी...आप लोगु कि टिपण्णी बहुत उत्साह बड़ान्दी!!! जुगराज रयाँ

Vijay Gaur धन्यबाद श्रधेय गौर जी !!! एक साहित्यकार का मुख से कुछ भि सुण णु बड़ा सम्मान कि बात च और अगर तारीफ़ च त फिर याँ से भलु क्या हवे सकदु..आशा च समय -२ पर अपणी टिपण्णी देणा रैल्या!!!
विजय



Tuesday, 28 August 2012

कोसिस  कन्न  वलों कि  कभि हार नि हून्दी!!!!!



कोसिस  कन्न  वलों कि  कभि हार नि हून्दी,
ढंग से छईं कूड़ी, सलीका से मिसयीं पटैली 
कन्न-कन्न बस्ग्याल मा भि नि चूंदी!!!! 

ब्वे का पुटगा मस्त खिलदु नौनु,
भैर आन्द हि दौड़ नि सकदु,
लगातार एक द्वी साल कु प्रयास,
खुचिला बीटी भुयां औंण मा लगदु.
ग्वया लगाण से अट्गणा कि मंसा,
बालामन मा सदनी बणी रौंदी,
कोसिस कन्न वलों कि .........

परिवर्तन ज़िन्दगी कु एक बडू सच च,
इंसान त क्या प्रकृति भि या से बचीं नि च,
बगत का पाणि मा बगदु मन्खी छाल जरुर पौन्चदु,
जू बगत का साथ नि ऐन,वोंकु भगवान् भि ख्याल नि रखदु ,
खैरी का बाटों हिटणु रै,
एक ना एक दिन स्या उकाल जरुर पुरेंदी,
कोसिस कन्न वलों कि कभि......

कांडों भ्वरीं यीं दुन्या मा त्वै खुणी फूल भि धरयांन,
कखी तू कांडों चलदा चलदा हि नि थकी जै,
त्येरा बांठा सुख त्वे सिनक्वैली मिल ला,
मन्न कि वीं आस तू छोडि नि दये,
दगडया! यी दुन्या मा अयूँ छै त या गेड़ बाँधि ल्ये,  
बिन रुयाँ त ब्वे बि दूध नि दयेंदी,
पर कोसिस कन्न वलों कि कभि हार नि होंदी ...
कभि हार नि होंदी.....

"विजय गौड़ "२८.०८.२०१२ 
सर्वाधिकार सुरक्षित...


Public views:

    • सुनीता शर्मा nicely translated in our own way ,congrats


      Satendra Rawat बहुत अच्छु ल्याख विज्जू भै. कांडों भ्वरीं यीं दुन्या मा त्वै खुणी फूल भि धरयांन,
      कखी तू कांडों चलदा चलदा हि नि थकी जै.


      Vijay Gaur धन्यबाद सत्ती भाई...जुगराज रयाँ मेरी बात समझण का वास्ता
      about an hour ago ·  · 1
      Jagpal Rawat bahut hi badiya likhu Gaur bhai. kanda bari yu dunya kahi chalda chalda thaki n jai. Samaj thai badiya message dina wasta Satendra Rawat धन्यबाद ता हम थै आपकू करण चैन्दा लोगु थै अपनी बात समझणा का वास्ता.
      Vijay Gaur ‎.जुगराज रयाँ भै-बन्दों..
      Vijay Gaur ‎@जगपाल भै: आप थीं याद होलू यीं कविता की शुरू की लैन आपका रामनगर का वास्ता रेल का प्रस्ताव का दिन लिख्यान...त आप भी धन्यबाद का पात्र छन...
      about an hour ago ·  · 1
      Narendra Rawat wah wah kya baat ..kya baat...kya battttttttttt bahut khubbbbbbbbb
      7 minutes ago · 
      Vijay Gaur dhanybaad mitra..


      Bhishma Kukreti1:03pm Aug 28

      आनंददायक
      प्रेरणादायक